विश्वभर में प्रसिद्धः है ये “शक्तिपीठ” जहाँ उपासना करने से पूरी होती है हर मनोकामना

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धार्मिक जगत : देवी मां के पवित्र शक्ति पीठ पूरे भारत के अलग-अलग स्थानों पर स्थापित हैं। देवी पुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है तो देवी भागवत में 108 और देवी गीता में 72 शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है, वहीं तन्त्र चूड़ामणि में 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं। देवी पुराण के मुताबिक 51 शक्तिपीठ में से कुछ विदेश में भी स्थापित हैं। भारत में 42, पाकिस्तान में 1, बांग्लादेश में 4, श्रीलंका में 1, तिब्बत में 1 तथा नेपाल में 2 शक्तिपीठ हैं।


हिंगलाज माता मंदिर, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सिंध राज्य की राजधानी कराची से 120 कि.मी. उत्तर-पश्चिम में हिंगोल नदी के तट पर ल्यारी तहसील के मकराना के तटीय क्षेत्र में हिंगलाज में स्थित एक हिन्दू मंदिर है। यह 52 शक्तिपीठ में से एक माना जाता है और कहते हैं कि यहां सती माता के शव को भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से काटे जाने पर यहां उनका ब्रह्मरंध्र (सिर) गिरा था।

Image result for हिंगलाज भवानी, पाकिस्तान- अंग (सिर)


कालीघाट शक्तिपीठ कोलकाता- अंग (दायें पैर का अंगूठा)
देश के 52 शक्तिपीठों में कालीघाट की मां काली अन्यतम हैं। ऐसी मान्यता है कि कालीघाट में मां सती के दाहिने पांव की चार अंगुलियां गिरी थीं। पुराणों में काली को शक्ति का रौद्रावतार माना जाता है। कालीघाट मंदिर में देवी की प्रतिमा में मां काली का मस्तक और चार हाथ नजर आते हैं। यहां लाल वस्त्र से ढकी मां काली की जीभ काफी लंबी है जो सोने की बनी हुई है और बाहर निकली हुई है। दांत सोने के हैं। आंखें तथा सिर गेरूआ सिंदूर के रंग से बना है और माथे पर तिलक भी गेरूआ सिंदूर का है।


अम्बाजी मंदिर, गुजरात- अंग (हृदय)
अम्बाजी माता मंदिर भारत के गुजरात-राजस्थान सीमा पर अरासुर पर्वत पर स्थित है। अरासुरी अम्बाजी मंदिर में कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है, केवल पवित्र श्रीयंत्र की पूजा मुख्य आराध्य रूप में की जाती है। मां अम्बाजी की मूल पीठस्थल कस्बे में गब्बर पर्वत के शिखर पर है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां तीर्थयात्रा करने आते रहते हैं, विशेषकर पूर्णिमा के दिन।


देवी तालाब मंदिर, जालंधर- अंग (बांया वक्ष)
देवी तालाब मंदिर जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर दूर स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह 52 शक्ति पीठों में से एक है। एक लोककथा के अनुसार, यह मंदिर उस जगह पर बनाया गया है, जहां पर देवी सती का बांया वक्ष गिरा था। 200 साल पुराना यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है और इसमें एक तालाब है, जो हिंदुओं द्वारा पवित्र माना जाता है।

अमरनाथ, पहलगांव, कश्मीर- अंग (गला)
अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्यों कि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं।

गुजयेश्वरी मंदिर, नेपाल- अंग (दोनों घुटने)
गुजयेश्वरी मंदिर, काठमांडु, नेपाल में स्थित एक हिंदू मंदिर है। यहां सती के शरीर के दोनो घुटने गिरे थे। इस कारण से यह 52 शक्तिपीठ में गिना जाता है। यहां की शक्ति हैं महाशिरा एवं भैरव हैं कपाली। कुछ लोगों का मानना है, कि इसका नाम गुह्येश्वरी मंदिर है।

कैलाश मानसरोवर, तिब्बत- अंग (दायां हाथ)
मानसरोवर तिब्बत में स्थित एक झील है। हिंदू तथा बौद्ध धर्म में इसे पवित्र माना गया है। इसके दर्शन के लिए हज़ारों लोग प्रतिवर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा में भाग लेते है। यहां देवी सती के शरीर का दांया हाथ गिरा था। इसलिए यहां एक पाषाण शिला को उसका रूप मानकर पूजा जाता है। यहां शक्तिपीठ है।

मुक्तिनाथ मंदिर, नेपाल- अंग (मस्तक)
मुक्तिनाथ वैष्‍णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह तीर्थस्‍थान शालिग्राम भगवान के लिए प्रसिद्ध है। शालिग्राम दरअसल एक पवित्र पत्‍थर होता है जिसको हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है। यह मुख्‍य रूप से नेपाल की ओर प्रवाहित होने वाली काली गंडक नदी में पाया जाता है। जिस क्षेत्र में मुक्तिनाथ स्थित हैं उसको मुक्तिक्षेत्र’ के नाम से जाना जाता हैं।

कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी- अंग (योनि)
कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर कामाख्या में है। यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। पौराणिक सत्य है कि अम्बूवाची पर्व के दौरान माँ भगवती रजस्वला होती हैं और मां भगवती की गर्भ गृह स्थित महामुद्रा (योनि-तीर्थ) से निरंतर तीन दिनों तक जल-प्रवाह के स्थान से रक्त प्रवाहित होता है। यह अपने आप में, इस कलिकाल में एक अद्भुत आश्चर्य का विलक्षण नजारा है।

शुचि, शुचितीर्थम शिव मंदिर, तमिलनाडु अंग (ऊपरी दाड़)
तमिलनाडु के कन्याकुमारी-तिरुवनंतपुरम मार्ग पर शुचितीर्थम शिव मंदिर है, जहाँ पर माता की ऊपरी दंत गिरे थे। इसकी शक्ति है नारायणी और भैरव को संहार कहते हैं।

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