दर्द से छलकते मज़दूर के आँसू “घर बनाने वाले बेघर” कुदरत का ये कैसा इंसाफ़


रिपोर्ट : गीतिका शर्मा ( विशेष संवाददाता )

कानपुर : इस वक़्त कोरोना योद्धाओं द्वारा जैसे हालातों पर काबू किया जा रहा है उसकी तारीफ शब्दो मे कर पाना शायद मुमकिन हो, लेकिन इन्ही योधाओं में एक नाम और है किसान और मजदूर जिनकी बदहाली और क़िस्मत और उनकी पीड़ा पर बहुत कम इंसान आगे आ रहा है, वैसे कागजों और बयानबाजी नुमा दिखावे आपको अक्सर देखने को मिल ही जाते होंगे ।

बात करते हैं सबसे पहले हमारे लिए घर बनाने वाले मजदूर की जो आज ख़ुद बेबस और तन्हाई की ज़िन्दगी गुजारने को मजबूर है, इनकी बदनुमा हालातों पर बहुत से इंसानों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी अपनी तरह से किसानों के दर्दो को अपने आप मे समेटकर उन अन्नदाताओं और मजदूरों की व्यथा को किसी न किसी रूप में व्यक्त किया जिसमें कानपुर शहर के नमन दीक्षित के मार्गदर्शन में काम कर रही “टीम थिंक” ने मजदूरों के दर्द एक नाट्य रूपांतरण नुमा वीडियो के द्वारा शोशल मीडिया पर जारी कर के किया, ये वीडियो लोगों द्वारा काफ़ी पसंद भी किया जा रहा है, आइये आपको दिखाते हैं वो “टीम थिंक” का वीडियो जो नमन दीक्षित और उनके साथी कलाकारों आराधना सिंह, प्रीति शुक्ल, दीक्षा तलरेजा, अनन्या बाजपाई, दिब्यानशी गुप्ता, अनुराग द्विवेदी, कार्तिक त्रिपाठी, मोहित त्रिवेदी, राज गुप्ता, समर्पित मारवाह, नवीन गुप्ता, आदित्य सिंह, हर्षिल पांडेय के द्वारा बनाया गया है ।

वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें ।



पार्ट 2nd : अब चलते हैं दूसरी ओर दूसरे नाम के साथ जिनका नाम है शुभम कुमार जिन्होंने डिप्लोमा सिविल इंजीनयरिंग किया हुआ है, साथ ही शुभम ग्राम मुस्तफाबाद रूरी सादिकपुर बांगरमऊ ‘उन्नाव के रहने वाले हैं, शुभम को लिखने का शौक बचपन से ही था पर ज्यादा किसी को बताता नहीं था क्योंकि शुभम को लगता था की शायद ये किसी को सुनाने के लायक नहीं है फिर दोस्तों ने लिखने के लिए प्रेरित किया और फ़िर शुभम ने दुबारा लिखना शुरू किया ।

शुभम से उनके इस शौख के बारे में हमारी विशेष संवाददाता गीतिका शर्मा ने जब उनके फ़ेवरेट कवियों और लेखकों के बारे में पूछा और जानकारी ली तो शुभम ने बताया की कबीरदास जी तुलसीदास जी सूरदास जी के अलावा उसे कहानियां जनरल नॉलेज, समाचार पत्र पढ़ने का शौक हैै, जब हमारी संवाददाता ने आज के कवियों के बारे में उनके पसंदीदा कवियों की पसंद पूछा तो शुभम ने बताया कि इस दौर के कवियों में डॉ. कुमार विश्वास जी गजेंद्र प्रियांशु जी और अनामिका अम्बर जैन जी को सुनना अच्छा लगता है, पढ़ाई अब ख़त्म हो चुकी है इसलिए अभिनय कला में रूचि है, इसलिए बतौर सहायक निर्देशक टीवी इंडस्ट्री में काम सीख रहा हूँ ।


 

Indianews24x7.in@LockDownआइये शुभम कुमार की लिखी मजदूरों की माली हालात पर ताज़ी कविता पर नज़र डालते हैं, जो शोशल मीडिया पर काफ़ी पसंद की जा रही है ।

इन इमारतों की परछाई से बाहर निकलकर ,
लम्बी लम्बी सडकों की बाहें पकड़कर,
अपने गाँव अपने घोसलों को वापिस हैं जाते,
रास्तों में सबको हैं अर्जी लगाते,
आज न सिस्की कोई भगवान सुनते
आज क्या तुमसे ही इतने दूर है वो ,
भूख से सडको पे व्याकुल मर रहे जो राष्ट्र के निर्माणकर मजदूर हैं वो ||

तेरी ईमारत के है उसने पत्थर सजाये ,
रंग तेरी फर्श पर उसने बिछाए ,
क्या नहीं इस वक़्त उसका कोई ठिकाना ,
क्यों नहीं हमने इन्हे हम सा है माना ,
जीने की एक छोटी सी उम्मीद लेकर
मौत से लड़ने को अब मजबूर है जो ,
भूख से सडको पे व्याकुल मर रहे जो राष्ट्र के निर्माणकर मजदूर हैं वो ||

हाल पर उनके है केवल बस सियासत,
क्या उन्हें मिल पायेगी जीते जी राहत ,
पार कितनी मुश्किलों को कर रहे है ,
राह में कितने ही साथी मर रहे है ,
एक नए भारत का थे सपना सजाये ,
आज सपने सरे चकनाचूर है क्यों ,
भूख से
सडकों पे व्याकुल मर रहे जो राष्ट्र के निर्माणकर मजदूर हैं वो.. ||

खा रहे है धैर्य आंसू पी रहे हैं,
बच्चे उनके मौत को भी जी रहे हैं ,
हौंसले भी पस्त अब होते है,
प्राण पाते है जो अपना घर वो पाते,
लौटकर वो फिर से अब शायद ही आएं ,
घर की रोटी आधी भी मंजूर अब तो ,
भूख से सडकों पे व्याकुल मर रहे जो राष्ट्र के निर्माणकर मजदूर हैं वो…


 

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