पो’स्टिंग गैंग पर भारी प्रवीन साहनी की “द राजनीति” की ख़बर, सवा करोड़ में कानपुर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाने वाले शख्स को STF नेे किया गिरफ्तार।

रिपोर्ट : अनुराग श्रीवास्तव अन्ना / इंडिया न्यूज़ 24×7

उत्तरप्रदेश एसटीएफ को जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले में एक बड़ी सफ़लता हाँथ लगी है, ताज़ा मामला सरकारी नौकरी का प्रलोभन व उच्च पदों पर तैनाती कराने के नाम पर लाखो रुपयों की ठगी करने का है ।

आपको बताते चले कि मामला तब प्रकाश में आया जब जाने-माने “वरिष्ठ पत्रकार” प्रवीन साहनी के ‘‘द-राजनीति’’ चैनल पर रुपयों के लेनदेन का ऑडियो क्लिप वायरल हो गया, जैसे ही ये क्लिप वायरल हुआ देखते ही देखते लाखों व्यूज़ आने से वीडियो शोशल मीडिया पर ये क्लिप फ़ेमस हो गया, जिसके बाद हरकत में आई UP STF ने मामले को संज्ञान में लिया और इस सम्बन्ध में उ.प्र शासन की एक जांच के क्रम में अधिकारियों के ट्रान्सफर/पोस्टिंग के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले शातिर आरोपी पीयूष अग्रवाल को धर दबोचा, आपको बताते चलें के STF द्वारा पीयूष को गाज़ियाबाद स्थिति श्रृष्टि अपार्टमेंट, राजनगर एक्सटेंशन से गिरफ्तार किया गया है ।

पुलिस महानिरीक्षक, STF UP अमिताभ यश के निर्देशन में गठित टीम द्वारा इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था जिसमें प्रभारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह के नेतृत्व में गठित टीम के समक्ष पकड़े जाने के बाद आरोपित पीयूष अग्रवाल ने स्वयं इस जालसाज़ी के मामले पर से पर्दा उठाया और पूछताछ में कबूला की वो इस मामले में अकेले नही संलिप्त था उसके साथ कुछ अन्य लोग भी शामिल थे, आरोपी पीयूष सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका में अपने मंसूबों को अंजाम देता था जाँच में पता चला कि आरोपी एक नेशनल न्यूज़ चैनल का पत्रकार भी है, आरोपी पीयूष ने “रा राजनीति” चैनल पर वायरल हुई आडियो क्लिप की पुष्टि करते हुए उसे सही माना व धटना के बारे में बताया कि इस क्लिप में उसके व किसी कमलेश नाम के व्यक्ति के मध्य हुई वार्ता है, आगे मामले पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सोसायटी में ही रहने वाले गौरी कान्त दीक्षित से उसका पारिवारिक सम्पर्क है जो धोखाधड़ी के कार्यो में पूर्व में भी लिप्त रहा हैं।

पीयूष से पूछताछ करने पर कई हैरान करने वाले तथ्य भी सामने निकलकर आये जिसमे उसने इस पूरी जालसाज़ी में साथ देने वाले गौरीकान्त दीक्षित के कई मामलों भी उजागर किये, पीयूष के मुताबिक साथी गौरीकांत ने पूर्व में एक IAS को उपाध्यक्ष, कानपुर नगर विकास प्राधिकरण के पद पर नियुक्ति कराने के लिये कहा था, तब उसने गौरीकान्त दीक्षित से कहा कि इस कार्य हेतु सवा करोड़ रूपये खर्च होगा, इतना ही नही भरोसा जितने के लिए उस IAS के साथ इसी सिलसिले में वह गौरीकान्त के साथ एवं अकेले लखनऊ कई बार आया और गया भी था।


आइये जानते है पीयूष की भाषा और कुबुलनामे के अंदाज़ में इस आगे की कहानी को ….

आरोपी पीयूष के मुताबिक STF के सामने की आगे की वार्तालाप इस प्रकार है

पीयूष : गौरीकान्त ने ही कमलेश से मेरी मुलाकात लखनऊ मेें कराई थी, कमलेश एवं उक्त IAS के रिष्तेदार दोनों बिजनेस पार्टनर हैं। गौरीकान्त के ही कहने पर कमलेश दिनांक-02.03.2020 को फोन पर बात करके मुझसे मिले और राजधानी लखनऊ के एक होटल में आकर एक लिफाफे में एडवांस के रूप में पन्द्रह लाख रूपया दिया था, जिसमेें से उसी समय दो लाख रूपया कमलेश को दे दिया था तथा दो लाख गौरीकान्त दीक्षित के बैंक खाते में जमा करवा दिया था, शेष 11 लाख रूपये स्वयं मैं लेकर इटावा होते हुये दिल्ली चला गया था।


वायरल ऑडियो को सुनने के लिये इस द राजनीति के पेज़ के उस न्यूज़ क्लिप को सुने व देखें ।




ट्रान्सफर कराने हेतु हरसंभव प्रयास किया किन्तु लाकडाउन होने के कारण किसी से सम्पर्क नहीं हो सका, जिसके कारण काम नहीं होने पर कमलेश पैसा वापस मांगने लगे। गौरीकान्त दीक्षित से बात हुई। उक्त पैसा गौरीकान्त दीक्षित के साथ मिलकर धोखाधड़ी से किसी को देने के नाम पर लिया था, और यह सोचा था कि अपने सम्पर्को के माध्यम से काम करवा दूंगा। इसी बीच गौरीकान्त को साउथ दिल्ली पुलिस ने किसी मामले में गिरफ्तार कर लिया, जिसमें वह जेल चला गया था, जिसकी जमानत कराने में करीब ढाई तीन लाख रूपये खर्च हो गया। मकान का किराया, बिजली का बिल एवं बच्चों के फीस आदि बकाया थी, जिसका भुगतान इन्हीं रूपयों से कर दिया था तथा शेष बचे हुये रूपये लाॅकडाउन में इधर-उधर खर्च हो गये। काम न हो पाने के कारण कमलेश पैसा वापस करने हेतु दबाव बनाने लगे जिसके बाद कमलेश से मेरा आपसी विवाद हो गया, तब गौरीकान्त दीक्षित ने उसके व कमलेश के मध्य हुई वार्तालाप का आडियोे पत्रकार के माध्यम से वायरल करा दिया।

ये था पीयूष के मुताबिक STF के सामने कुबूलनामा

जाँच में अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार अभियुक्त पीयूष का जो कि DD नेशनल न्यूज़ चैनल का पत्रकार होने का दावा कर रहा था वो नेशनल चैनल का परिचय पत्र भी फर्जी पाया गया।

गिरफ्तार पीयूष अग्रवाल के विरूद्ध थाना विभूतिखण्ड गोमतीनगर लखनऊ में कई गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर आगे की कार्यवाही करने की तैयारी स्थानीय पुलिस को सौंप दी गयी है ।

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