देश के चुनिंदा शक्तिपीठों में से एक है ये दिव्या मंदिर, जहां मातारानी व भैरवनाथ एक ही गद्दी पर हैं विराजित


आज हम बता कर रहें है मध्यप्रदेश के मंदसौर शहर से पांच किमी दूर ग्राम में स्थित देश के चुनिंदा शक्तिपीठों में से एक नालछा माता मंदिर के बारे में नालछा माता मंदिर. यह अति प्राचीन मंदिर है जिसका उल्लेख विभिन्न ग्रंथों में ही मिलता है. इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि मां नालछा दिन में तीन बार रूप बदती है; सुबह बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और रात्रि में वृद्धावस्था का रूप दिखता है. नालछा माता के आशीर्वाद के लिए लोग अंगारों पर दौड़ते हैं. माता का मंदिर अपने आलोकिक चमत्कारों के चलते तो प्रख्यात है ही, वही मान्यता है कि यह ऐसा दिव्य मंदिर है,जहां मातारानी और भैरवनाथ दोनों एक ही गादी पर विराजित हैं. बता दें कि प्राचीन मान्यता के अनुसार राजा दशरथ के राज्य अयोध्या की सीमा का यह अंतिम पड़ाव था. पास बहने वाले नाले के किनारे ही राजा दशरथ ने श्रवण कुमार का वध किया था, तभी से नाले को श्रवण नाले के नाम से ही जाना जाता है.

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आपको बताते चलें कि नवरात्रि पर मां का विशेष श्रृंगार आभूषणों से किया जाता है. नौ दिन तक महाआरती और धार्मिक आयोजनों का दौर दिन भर चलता है. वही, मंदिर पर शारदीय और चैत्र नवरात्रि में विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं, साथ ही प्रति रविवार सुबह शाम माता की महाआरती का आयोजन भी किया जाता है.  यहां सैकड़ों वर्षो पुराने इस नालछा माता मंदिर की ख्याति 3 दशकों से काफी बड़ी है. शहरी नहीं अपितु जिले व प्रदेश के विभिन्न अंचलों से भी यहां माता से जो भी सच्चे मन से कोई भी मुराद मांगता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता.

साभार : पलपल इंडिया

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