चैत्र नवरात्र इस बार बनेगा पांच बार विशेष सिद्धि योग

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अनुष्ठान और साधना के लिए चैत्र नवरात्रि श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है. शरद ऋतु के समान वसंत ऋतु में भी शक्ति स्वरूपा दुर्गा की पूजा की जाती है. इसी कारण इसे वासंतीय नवरात्रि भी कहते हैं. दुर्गा गायत्री का ही एक नाम है. अत: इस नवरात्रि में विभिन्न पूजन पद्धतियों के साथ-साथ गायत्री का लघु अनुष्ठान भी विशिष्ट फलदायक होता है. चैत्र शब्द से चंद्र तिथि का बोध होता है. सूर्य के मीन राशि में जाने से, चैत्र मास में शुक्ल सप्तमी से दशमी तक शक्ति आराधना का विधान है.


Image result for चैत्र नवरात्र इस बार बनेगा पांच बार विशेष सिद्धि योगचंद्र तिथि के अनुसार, मीन और मेष इन दो राशियों में सूर्य के आने पर अर्थात चैत्र और वैशाख इन दोनों मासों के मध्य चंद्र चैत्र शुक्ल सप्तमी में भी पूजन का विधान माना जाता है. यह काल किसी भी अनुष्ठान के लिए सर्वोत्तम कहा गया है. माना जाता है कि इन दिनों की जाने वाली साधना अवश्य ही फलीभूत होती है.. निम्न‍लिखित मंत्रों का जप कर साधक पूरे जीवनभर सुखी जीवन बिता सकता है.

धन-धान्य से परिपूर्णता के लिए इन मंत्रों का प्रयोग करें-

(1) ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति माहेश्वरि अन्नपूर्णे स्वाहा..’

(2) ‘ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धनधान्यः सुतान्वितः.

मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः..’

(3) ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति अन्नपूर्णे नम:..’

उपरोक्त मंत्रों को बतौर अनुष्ठान 10 हजार, सवा लाख जप कर दशांस हवन, तर्पण, मार्जन व ब्राह्मण भोजन कराएं. नित्य एक माला जपें.

हवन सामग्री में तिल, जौ, अक्षत, घृत, मधु, ईख, बिल्वपत्र, शकर, पंचमेवा, इलायची लें. समिधा, आम, बेल या जो उपलब्ध हो.

गायत्री मंत्र का होता है महत्‍व

इस अवधि में गायत्री मंत्र का जाप अनुष्ठान के दौरान जरूर करना चाहिए. इन दिनों दुर्गासप्तशती का पाठ करना भी अच्छा माना जाता है. देवी भागवत में इसकी बड़ी महिमा बताई गई है. आत्मशुद्धि और देव पूजन के बाद गायत्री जप आरंभ करना चाहिए. सूर्या‌र्घ्य आदि अन्य सारी प्रक्रियाएं उसी प्रकार चलानी चाहिए, जैसे दैनिक साधना में चलती हैं. अनुष्ठान के दौरान यह कोशिश करनी चाहिए कि पूरे नौ दिन जप संख्या नियत ढंग से पूरी करनी की जाए. ध्यान रखना चाहिए कि उसमें व्यवधान ना आ सके या कम से कम पड़े. इस वर्ष ये अवधि 6 अप्रैल से आरंभ हो कर 14 अप्रैल होगी.


 

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