भारत के बाद अब फ्रांस में भी गरमाया राफेल मुद्दा, NGO ने की जांच की मांग


भारत और फ्रांस के बीच सितंबर 2016 में राफेल डील हुई थी. जिसकी काफी समय से चर्चा हो रही है. बता दें कि इनदिनों राजनीतिक में भी इस मुद्दे को लेकर कई बार भारत सरकार पर निशाना साधा गया है. वहीं अब भारत के साथ-साथ फ्रांस में भी इस मुद्दे को लेकर गरमा-गरमी का माहौल बन गया है. इस डील को लेकर सवाल हो रहे हैं. आपको बता दें कि सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक राफेल डील का मामला ​छाया हुआ है. केवल भारत ही नहीं, फ्रांस में भी यह मुद्दा गरमा चुका है. फ्रांस के एक एंटी-करप्शन एनजीओ ने इस डील पर सवाल उठाते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रीय वित्तीय अभियोजक के कार्यालय में एक शिकायत दर्ज कराई है. खबरों के अनुसार, सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस के बीच हस्ताक्षर की गई 59,000 करोड़ रुपए की राफेल डील की जांच की मांग की गई है. शेरपा नामक एनजीओ ने अपनी शिकयत में राफेल लड़ाकू विमान के निर्माता दसॉ एविएशन द्वारा भ्रष्टाचार के संभावित कृत्यों, अनुचित फायदे और मनी लॉंन्डरिंग जैसे मामलों की जांच के लिए अनुरोध किया गया है.

आपको बता दें कि एनजीओ शेरपा के संस्‍थापक विलियम बोर्डन के अनुसार इस डील में जो कुछ भी हुआ, वह गंभीर है. यह शिकायत पूर्व मंत्री और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले एक वकील की ओर से सीबीआई में दायर शिकायत के आधार पर की गई है. यह शिकायत अक्टूबर के अंत में राष्ट्रीय वित्तीय अभियोजक के कार्यालय के साथ दर्ज की गई थी, जिसमें परिस्थितियों की जांच की मांग की गई है. बता दें कि इस डील के तहत दसॉ द्वारा उत्पादित 36 लड़ाकू विमान भारत को बेचे जाने हैं.

वही, बताया जा रहा है कि पिछले कई महीनों से कांग्रेस और राहुल गांधी राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर सवाल खड़े करते आए हैं. उनका आरोप है कि संप्रग सरकार के समय विमान की तय कीमत के मुकाबले मोदी सरकार ज्यादा कीमत अदा कर रही है. इस सौदे में ऑफसेट साझेदार के तौर पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को उपेक्षित रखा गया और रिलायंस डिफेंस को फायदा पहुंचाया गया है. सरकार की तरफ से कांग्रेस और राहुल गांधी के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है.

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