भौम प्रदोष व्रत करने से मिलेगी मोक्ष की प्राप्ति, जानिए व्रत कथा 


प्रदोष व्रत में शिव और पार्वती की पूजा व आराधना की जाती है। बता दें कि प्रत्येक मास में दो प्रदोष व्रत होते हैं इन प्रदोष व्रत से सभी पापों का नाश व मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त होता है और इस बार का प्रदोष व्रत तुलसी पूजा के बाद यानि कि मंगलवार के दिन है। आपको बता दें कि हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।  प्रदोष व्रत जब मंगलवार के दिन होता है उसे भौम प्रदोष व्रत माना गया है। इस बार 20 नवंबर 2018 को भौम प्रदोष व्रत है। प्रदोष व्रत में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जन्म-जन्मान्तर के फेरों से निकल कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढता है। उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है। वही, प्रदोष व्रत को त्रयोदशी के दिन रखा जाता है। प्रत्येक मास में दो प्रदोष व्रत होते हैं।

आपको बताते चलें कि प्रदोष व्रत को अत्यधिक शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता यह भी है इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और भगवान शिव की कृपा से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। उसी तरह प्रदोष व्रत रखने और साथ ही दो गाय दान करने से भी यही सिद्धी प्राप्त होती है। भौम प्रदोष व्रत को करने से मनुष्य में सुविचार और सकारात्मकता आती है और वह अपने जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं। साथ ही चलिए जानते हैं इस प्रदोष व्रत की कथा के बारे में….

भौम प्रदोष व्रत कथा :-

प्राचीन समय की बात है एक नगर में एक वृद्ध महिला रहती थी। उसका एक पुत्र था। बुजुर्ग महिला की भगवान हनुमान पर गहरी आस्था थी। वो हर मंगलवार को व्रत रख भगवान हनुमान की आराधना करती थी। एक बार भगवान हनुमान ने उनकी श्रद्धा की परीक्षा लेने की सोची। और भगवान हनुमान साधु का वेश धारण कर बुजुर्ग महिला के घर गए और पुकारने लगे – है कोई हनुमान भक्त, जो मेरी इच्छा पूर्ण कर सकें? उस साधु की पुकार सुनकर बुजुर्ग महिला बाहर आई और बोली- आज्ञा दें महाराज। तभी भगवान हनुमान बोले- मुझे बहुत भूख लगी हैं, भोजन करना हैं, तू थोड़ी जमीन लीप दे। ये सब सुनकर बुजुर्ग महिला दुविधा में पड़ गई। और हाथ जोड़कर बोली- हे साधु महाराज, लीपने और मिट्टी खोदने के अलावा आप कोई दूसरी आज्ञा दें, मैं अवश्य करूंगी। फिर साधु ने तीन बार प्रतिज्ञा करवाई और कहा – अम्मा, तू अपने बेटे को बुला। मैं तेरे बेटे की पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा।

यह सुन बुजुर्ग महिला घबरा गई, परंतु वो अब प्रतिज्ञा ले चुकी थी। उसने अपने पुत्र को घर के बाहर बुलाकर साधु को दे दिया। साधु ने बुजुर्ग महिला के हाथों से ही उनके पुत्र को पेट के बल लिटवाया। पुत्र के पीठ पर आग जलवाई। आग जलाकर उदास मन से बुजुर्ग महिला अपने घर में चली गई। भोजन बनाने के बाद साधु ने बुजुर्ग महिला को बुलाकर कहा- तुम अपने पुत्र को पुकारो ताकि वह भी आकर भोजन करें। बुजुर्ग महिला बोली- मेरे पुत्र का नाम लेकर, मुझे और कष्ट न दो। लेकिन जब साधु महाराज नहीं माने तो बुजुर्ग महिला ने अपने पुत्र को आवाज लगा ही दी। अपने पुत्र को जीवित देख बुजुर्ग महिला को बहुत आश्चर्य हुआ और वह साधु महाराज के चरणों में गिर पड़ी। बुजुर्ग महिला की भक्ति देख भगवान हनुमान अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुए और बुजुर्ग महिला को भक्ति का आशीर्वाद दिया।

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