मां शाकंभरी देवी की यात्रा करना इतनी बार है अनिवार्य


राजस्थान के शेखावाटी अंचल में मालकेतु पर्वत के बीच एक पहाड़ी नदी शंकरा या शक्रधारा के किनारे मां शाकंभरी देवी का भव्य मंदिर है. इनके पास शंकर भगवान के कई स्वरूपों के तथा शक्तिस्वरूपा देवियों से ज्यादा देवालय हैं. इनमें शाकंभरी माता, जीण माता और लोहागर्ल जी ज्यादा प्रसिद्ध हैं. वैसे मनसा माई और शीतलाक्षी (शीतला) माता के मंदिर भी यहां हैं.

शेखावटी अंचल में इन तीर्थों और देवालयों की काफी मान्यता है.  शाकंभरी माता का यह मंदिर काफी भव्य है. इसे शाकंभरी माता की प्रसिद्ध तीन पीठों में इसे सबसे प्राचीन माना जाता है. दूसरी प्रसिद्व पीठ जयपुर जिला में स्थित नमक की झील सांभर के पास है. तीसरा प्रसिद्ध पीठ उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से 48 किलोमीटर दूर शिवालिक की पहाड़ियों में स्थित है.

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कैसे पहुंचें :-

जयपुर, सीकर और झुंझुनूं से सड़क मार्ग से उदयपुरवाटी आना पड़ता है. सकराय जाने के लिए एकमात्र सड़क उदयपुरवाटी से होकर ही जाती है. इस मार्ग पर लगभग 14-15 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद पहाड़ों की शृंखला के बीच यह गांव है. पहले उदयपुरवाटी से ऊंटगाड़ी द्वारा ही यहां तक लोग पहुंचते थे. कच्ची सड़क बनने के बाद एक बस सुबह-शाम चलने लगी. अब तो उदयपुरवाटी से टैक्सियां भी मिल जाती हैं.

दो बार जाना अनिवार्य :- 

शाकंभरी माता चौहान राजवंश, इस क्षेत्र के ब्राह्मण, वैश्य, गुर्जर अन्य जातियों की कुलदेवी हैं. यहां कम से कम दो बार आना अनिवार्य है. एक बार विवाह के बाद जोड़े से आशीर्वाद लेने और दूसरी बार पुत्र के मुंडन संस्कार के लिए. मारवाड़ी भाषा में इसे ‘जात-जड़ूला’ कहा जाता है.

साभार : पल-पल इंडिया

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