भाई दूज के दिन बहनें करती है भाईयों की लंबी उम्र की कामना, जानिए शुभ मुहूर्त व कथा


दिवाली के दूसरे दिन देश के कई राज्यों में भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है. इस दिन को सभी भाई और बहन बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं. भाई दूज के दिन सभी बहनें अपने भाइयों को सुबह स्नान करने के बाद पूजा करती हैं व पूजा में अपने भाई को किसी प्रकार का कष्ट ना हो ऐसा बोलकर घर की देरी पर सुपारी को तोड़ती हैं. उसके बाद अपने भाई का तिलक करती हैं. आपको बता दें कि भाई दूज के त्यौहार में भाईयों को तिलक लगाने का विधान है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है. दिवाली के दो दिन बाद आने वाले त्यौहार को भाईया दूज भी कहा जाता है. इस साल 9 नवंबर, शुक्रवार को भाई दूज मनाया जाएगा. भाई दूज के दिन बहनें अपने भाईयों को तिलक लगाकर उनकी लम्बी उम्र की कामना करती हैं. इस दिन भाई को तिलक करना अत्यंत शुभ माना जाता है.

ऐसी मान्यता है कि भाई दूज के दिन बहन के घर भोजन की परंपरा है. माना जाता है कि यमुना ने भाई यम को इस दिन खाने पर बुलाया था. इसी वजह से इस दिन को यम द्वितिया भी कहा जाता है. विद्वानों के अनुसार जो व्यक्ति भाई दूज के दिन अपनी बहन के घर भोजन करता है उसकी लम्बी उम्र तो होती ही है. साथ ही वो व्यक्ति मृत्यपरांत नरक नहीं जाता है.


 

जानिए भाई दूज का शुभ मुहूर्त :-

भाई दूज (9 नवंबर 2018) पर तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:09 मिनट से 03:17 मिनट तक का है. साथ ही अगर आप इस समय पर अपने भाई को तिलक नहीं लगा सकती तो शुभ के चौघड़िया में भी तिलक कर सकती हैं. भाई दूज पर शुभ का चौघड़िया 12:10  से 01:25 तक रहेगा, इसके आलावा सुबह लाभ के चौघड़िया  08:00 से 09:20 तक है. इसमें भी भाई को तिलक किया जा सकता है.


 

भाई दूज तिलक लगाने की विधि :-

• बहनें सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें.

• तिलक के लिए थाल सजाएं. इसमें कुमकुम, सिंदूर, चंदन, फल, फूल, मिठाई, अक्षत और सुपारी आदि सामग्री रखें.

• पिसे हुए चावल के आटे या घोल से चौक बनाएं और शुभ मुहूर्त में इस चौक पर भाई को बिठाएं.

• इसके बाद भाई को तिलक लगाएं.

• भाई दूज के दिन जब तक भाई को तिलक नहीं किया जाता है. तब तक बहनों के व्रत करने का विधान है.

• इस दिन भाई को अपने घर का बना भोजन अवश्य खिलाएं.

• शाम को यमराज के नाम से चौमुखा दीया जलाकर बहनें घर के बाहर उसका मुख दक्षिण दिशा की ओर कर रखें.

• कुछ स्थानों पर इस दिन भाई को नारियल देने का भी विधान हैं.


 

जानिए भाई दूज की कथा :-

यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती हैं. वह उनसे घर आकर भोजन करने का निवेदन करतीं रहती हैं. पर यमराज अपने काम में व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात टाल जाते थे. बहन भाई को हमेशा घर बुलाती रहती हैं. कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने फिर भाई यमराज को भोजन करने के लिए बुलाया. बहन के घर जाते समय यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया. उस वक्त सभी जीव यमराज के भय और अकाल मृत्यु से मुक्त हो गए. भाई के घर आगमन पर यमुना ने खुशी से स्वागत किया. फिर भाई को भोजन करवाया. इससे प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वरदान मांगने को कहा. बहन ने भाई से कहा कि आप हर साल इस दिन मेरे यहां भोजन करने आना. इस दिन जो बहन अपने भाई को तिलक करके भोजन खिलाये, उसे आपका भय न रहे। इस तरह यमराज ने हामी भर दी…. यमराज तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमपुरी चले गए.

इसलिए प्राचीन समय से ही यह मान्यता है कि जो यह दिन भाई दूज रहा है. इस दिन बहनें भाई को अकाल मृत्यु और यमराज के प्रकोप से बचाती हैं. चाहे भाई जाकर बहन के घर भोज करें या बहन भाई के घर आए. यह आवश्यक होता है इसलिए भाई-दूज देशभर में मनाया जाता है.

LEAVE A REPLY