दीपोत्सव में धनतेरस देवी लक्ष्मी की आराधना का पहला दिन है.

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कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती. करमूले पार्वतीपुत्रः प्रभाते कर दर्शनम..

* प्रदीप लक्ष्मीनारायण दिवेदी (9772354346)  

* दीपोत्सव देवी लक्ष्मी की आराधना का सर्वोत्तम अवसर है तो इस अवसर का लाभ लेना चाहिए, लेकिन साथ ही प्रतिदिन प्रातःकाल जागते ही देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती और पार्वतीपुत्र श्रीगणेश के दर्शन का संकल्प भी लेना चाहिए, इससे वर्षभर संतोषप्रद सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.

* इस प्रार्थना का भावार्थ है…हथेली के आगे के भाग-अंगुलियों में देवी लक्ष्मी का निवास है, हथेली में देवी सरस्वती का निवास है तो हथेली के मूल में हमारी रक्षा करनेवाले ईष्टदेव- श्रीगणेश का निवास है, जिनके हम प्रातःकाल सर्वप्रथम दर्शन करते हैं.

* अलग अलग मंत्रों में हथेली के मूल में गोविंद, ब्रह्मा आदि के नाम भी आते हैं, इनका मूल उद्देश्य हमारी सुरक्षा करनेवाले, हमारा पालन करनेवाले हमारे ईष्टदेव के दर्शन करना है.

* दीपोत्सव में धनतेरस देवी लक्ष्मी की आराधना का पहला दिन है.

* धनतेरस की पूजा उपलब्ध शुभ मुहूर्त में करना चाहिए जब प्रदोषकाल में स्थिर लग्र हो.

* कहते हैं… पहला सुख निरोगी काया! देवी लक्ष्मी धन प्रदान करती हैं लेकिन उसके उपयोग की क्षमता- उत्तम स्वास्थ्य, आयुर्वेद के देवता धन्वन्तरि प्रदान करते हैं इसलिए उनकी पूजा-अर्चना कर उत्तम स्वास्थ्य की कामना करनी चाहिए.

* घर-परिवार के किसी भी सदस्य की अकाल मृत्यु से बचने के लिए त्रयोदशी को यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है, जिसे यम दीपम कहते हंै.

* स्वस्थ और सुंदर मन से देवी लक्ष्मी की आराधना करें, अगला वर्ष सुख-समृद्धि और सफलता का संदेश लेकर आएगा!

– आज का राशिफल –

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, कन्या,

वृश्चिक, धनु, मीन

*कुम्भ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित हैव्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्यग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमीवृद्धि संभव हैइसलिए अच्छे समयका सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

– सोमवार का चौघडिय़ा –

दिन का चौघडिय़ा         रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत               पहला- चर

दूसरा- काल                दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ               तीसरा- काल

चौथा- रोग                 चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग             पांचवां- उद्वेग

छठा- चर                   छठा- शुभ

सातवां- लाभ               सातवां- अमृत

आठवां- अमृत               आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.

दिन का चौघडिय़ा– अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

रात का चौघडिय़ा– अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

अमृतशुभलाभ और चरइन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेषतीन चौघडिय़ाओं– रोगकाल और उद्वेगको उपयुक्त नहीं माना जाता है.

यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैंस्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरुज्योतिर्विद्के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ  गंवाएं क्योंकिज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग

सोमवार, 5 नवंबर 2018

धन तेरस

यम पञ्चक प्रारम्भ

यम पञ्चक प्रारम्भ

यम दीपम

प्रदोष व्रत

काली चौदस

हनुमान पूजा

मासिक शिवरात्रि

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 10:57:52

मास अमांत आश्विन

मास कार्तिक

तिथि त्रयोदशी – 23:48:46 तक

नक्षत्र हस्त – 20:37:05 तक

करण गर – 12:35:46 तक, वणिज – 23:48:46 तक

पक्ष कृष्ण

योग विश्कुम्भ – 22:10:29 तक

सूर्योदय 06:35:40

सूर्यास्त 17:33:32

चन्द्र राशि कन्या

चन्द्रोदय 28:59:00

चन्द्रास्त 16:21:00

ऋतु हेमंत

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: दक्षिण में

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