पितृदोष के 16 दिनो तक भूलकर भी ना करें इन कार्यो को, साथ ही जानिए पितरों की शांति के उपाय 


लोगों का कहना है कि किसी भी शुभ कार्य  या पूजा-पाठ में  अपने पितृओ को उनकी आत्मा की शांति व उनकी नाराजगी को दूर करने की कामना करनी चाहिए जिससे पितरों को लगे कि उनके प्रति उनके परिवार में उन्हें सम्मान मिल रहा है। बता दें कि पूर्वजों को हमेशा अपने सम्मान की चाह होती हैं कि उनके वंश का कोई भी बड़ा सदस्य उनके प्रति सम्मान दें। वहीं, आपको बता दें कि 25 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरूआत हो रही है। पितृ पक्ष में लोग अपने मृत पूर्वजों को तर्पण के माध्यम से प्रसन्न करते हैं साथ ही आत्मा के परमात्मा से मिलन की कामना करते हैं जिससे मृत आत्माओं को मुक्ति मिल सके।

वही, बताया जाता है कि पितृदोष देश में भाद्रपक्ष की शुल्क पक्ष की पूर्णिमा से दिन पितृ पक्ष यानि श्राद्ध शुरू होते हैं और आश्विन अमावस्या तक 16 दिन श्राद्ध किए जाते है।लोगों का ऐसा मानना है कि पितृपक्ष में पितरों की आत्मा धरती पर आती है। यह पक्ष अपने पितरों को याद करने और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए होता है। श्राद्ध पक्ष के दौरान हमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, अन्यथा पितृ दोष का शिकार हो सकते हैं। आज हम आपको बताएंगें कि पितृ पक्ष के दिनों में कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए साथ ही हम आपको पितृ दोष कम करने के उपाय भी  बताएंगे तो चलिए उनके बारे में जानते हैं।


 

पितृदोष में न करें कुछ ऐसे कार्य :-

● पितृपक्ष में पुरुषों को दाढ़ी मूंछ नहीं बनवाने चाहिए। श्राद्ध के पिंडों को गाय, ब्राह्राण और कौओं को खिलाना चाहिए।

● पितृपक्ष में किसी जानवर या भिखारी का अनादर नहीं करना चाहिए। क्योंकि पितर किसी भी रुप में श्राद्ध मांगने आ सकते हैं।

● पितृपक्ष में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को दूसरे के घर पर खाना, पान और शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए। यह करना पितरों के लिए सही नहीं है ऐसा करने से पितर नाराज हो सकते है।

● पितृपक्ष में कभी भी लोहे के बर्तनों में खाना नहीं बनाना चाहिए। पितृपक्ष में ब्राह्राणों को भोजन करवाना चाहिए, यह उत्तम माना गया है।

● पितृपक्ष में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को ब्रह्राचर्य के व्रत का पालन करना चाहिए।


 

जानिए पितृ दोष कम करने के उपाय :-

● किसी भी मंगलिक कार्यक्रम, शुभ कार्य या पाठ पूजा में हमें अपने पितरों को अच्छे से याद करें, उनकी नाराजगी को दूर करें। क्योंकि पितर हमेशा सम्मान चाहते हैं।

● पितृपक्ष में पितृ दोष वाले व्यक्ति को पीपल के पेड़ पर दोपहर में जल, पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल, काले तिल चढ़ाएं और स्वर्गीय परिजनों का याद करें। ऐसा करने से पितृ दोष का निवारण होता है।

● पितृ दोष वाले लोगों को रोजाना महामृत्यूंजय का जाप करना चाहिए और शिवलिंग पर जल चढ़ा चाहिए। इससे  पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

● पितरों के श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराए या भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़, शक्कर, सब्जी और दक्षिणा दान करें। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल जाती है।

● अमावस्या के दिन शाम को किसी बबूल के पेड़ के नीचे अपने पितरो का याद कर खाना रखे। इससे पितृ दोष का निवारण जल्द ही हो जाता है।

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