जन्माष्टमी विशेष: हिंदू त्योहारों मे तिथि निर्णय, इसिलिए 2 सितम्बर को ही जन्माष्टमी का पर्व मनाना चाहिये

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हमेशा की तरह इस बार भी जन्माष्टमी पर्व पर संशय बरकारार है,सनातन हिंदू धर्म मे सभी त्योहार तिथियों के आधार पर ही मनाये जाते है,पिछले कुछ समय से तिथियां दोपहर या शाम के बाद प्रारम्भ या ख़त्म होती है,जिसके कारण हर तिथि का कुछ समय दोनो दिन रहता है इस कारण कोई भी पर्व दो दिन तक मनाया जा रहा है,धर्म सिंधु जो की तिथि के अनुसार पर्व कब मनाया जाय इसका निर्णय देता है, उसके अनुसार यदि कोई तिथि सूर्योदय से एक घंटे तक भी है तो वह तिथि पूरे दिन के लिये मान्य होंगी जबकि एक घंटे दूसरी तिथि लग जायगी,इस कारण कई पर्व दो दिन तक मनाया जाता है,इस कारण लोगो मे बड़ा संशय बढ़ जाता है,जो उस त्योहार की चमक को फीका कर देता है और सनातन धर्म के प्रति आस्था को भी डगमगाता है.

*संशय निराकरण*-

इस समस्या का स्पष्ट और विवेकपूर्ण समाधान हम खुद कर सकते है उसमे हमे उदयकालीन तिथि को दूसरे दिन उदयकाल तक मानने की आवश्यकता नही,जो तिथि जितने बजे प्रारम्भ होती है उस समय से वही तिथि मान्य की जाना चाहिये,उदाहरण के लिये कोई तिथि सुबह 9 बजे ख़त्म होती है तो उस समय के बाद दूसरी तिथि मान ली जाय.

*रामनवमी और जन्माष्टमी*

-रामनवमी का पर्व दिन मे 12 बजे और कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व रात्रि 12 मनाई जाती है,यदि

रामनवमी पर्व मे नवमी तिथि दिन के बारह बजे आती है तो इसी दिन रामनवमी मनाई जाना चाहिये भले ही यह तिथि दिन के 11 बजकर 50 मिनिट से ही प्रारंभ होती हो,इसी तरह यदि जन्माष्टमी पर्व के लिये अष्टमी तिथि और रात्रि के 12 बजे जब भी आये तभी जन्माष्टमी मनाना चाहिये,भले ही अष्टमी शाम को दोपहर को प्रारम्भ हो.

*चतुर्थी तिथि*-

भगवान गणेश की उपासना का यह पूरे वर्ष बड़े उत्साह से मनाया जाता है इसमे चंद्र दर्शन के विशेष महत्व रहता है इसलिए चंद्र दय के समय ही चतुर्थी तिथि का महत्व माना जायगा भले ही चतुर्थी तिथि शाम के बाद प्रारम्भ हो चंद्र उदय के समय भले ही आधा घंटा पहले ये तिथि प्रारंभ हुई हो,ऐसा करने से ही उस तिथी मे उस त्योहार का महत्व माना जायेगा,इस तरह जिस व्रत मे दिन और रात्रि का महत्व है उस समय वह तिथि चल रही हो उस समय ही वह व्रत मनाना चाहिये.


*इस बार 2 सितम्बर को जन्माष्टमी*-

इस बार अष्टमी तिथि 2सितम्बर को शाम 5बजकर 10 मिनिट से 3 तारीख को दोपहर 3.10 तक रहेगी,उदयकालीन तिथि अष्टमी 3 तारीख को है लेकिन भगवान कृष्ण का जन्म 12 बजे रात्रि और अष्टमी 2 तारीख को है इसिलिए 2 सितम्बर को ही जन्माष्टमी का पर्व मनाना चाहिये,इसी तरह सभी पर्व का निर्णय जनता को स्वयं अपने विवेक से करना चाहिये.

साभार : *प.चंद्रशेखर नेमा”हिमांशु”* 9893280184,7000460931

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