शिवराजपुर स्थित खेरेश्वर मंदिर में आज भी आते हैं अश्वधामा, भगवान शिव की करते है अाराधना


 Indianews24x7@ कुलदीप सिंह भदौरिया
कानपुर : सावन के इस पावन पर्व के मौके पर हम आपको भगवान शिव की एक ऐसी सैकड़ों साल पुरानी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां पर आज भी द्रोणाचार्य के पुत्र ‘अश्वधामा’ भगवान शिव की आराधना करते हैं। बता दें कि कानपुर से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गंगा के किनारे बसे शिवराजपुर कस्बे में सैकड़ों साल पुराना खेरेश्वर मंदिर है। यहां पर सावन पर्व के दौरान एक दस फिट का इंसान बिना दिखे भगवान भोले की अराधना करने के उपरान्त दिखता और आराधना करने के बाद चला जाता है। यहां के लोगों का दावा है कि करीब वह 36 सौ साल से बदस्तूर आता है और नजदीक पहुंचने से पहले कहीं गुम हो जाता है। वही बता दें कि इस बात को लेकर गांववालों का मानना है कि यह कोई और नहीं द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वथामा है। पुजारी आकाश पुरी गोस्वामी ने बताया कि इस मंदिर का इतिहास का जिक्र पुराणों में है। महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य खेरेश्वर मंदिर पर आकर पूजा अर्चना करते थे।इतना ही नहीं पांडव, कौरव और कर्ण ने भी यहीं पर शिक्षा दीक्षा ली थी।
1532153571

श्राप से मुक्त होने के लिए करता है शिव की पूजा :-
खेरेश्वर धाम की मान्यता है कि द्वापर युग में यह गांव पहले गुरु द्रोणाचार्य का आरायण वन हुआ करता था। यहीं पर द्रोणाचार्य ने पांडवों-कौरवों को शस्त्र विद्या सिखायी। मंदिर के महंत आकाश पुरी गोस्वामी कहते हैं कि वह 36 पीढ़ियों से खेरेश्वर महादेव की पूजा कर रहे हैं। गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा भी यहीं रहा करते थे। मंहत के मुताबिक महाभारत के युद्ध के दौरान अश्वत्थामा ने पांडवों के पुत्रों की छल से हत्या कर दी। भीम ने अश्वत्थामा के माथे में लगी मणि निकालकर उसे शक्तिहीन बना दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दिया वह धरती पर तब तक पीड़ावश जीवित रहेगा जब तक स्वयं महादेव उसे उसके पापों से मुक्ति न दिला दें। तभी से ये कहा जाता है कि महादेव से मुक्ति की प्रार्थना के लिए यहां अश्वत्थामा हर रोज सबसे पहले जल चढ़ाने आता है।
mandir_5b52ce2ef1edb-1

औरंगजेब से भिड़कर बचाया था मंदिर को :-
खेरेश्वर मंदिर के पुजारी ने बताया कि मंदिर के पास पहले द्रोणाचार्य की कुटिया बनी थी। जिसे मुगल शासक औरंगजेब ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। बावजूद कुटिया की निशानी आज भी मौजूद हैं। वही महंत आकाश पुरी गोस्वामी ने बताया कि उनके परिजन बताया करते थे कि शाम के वक्त कुटिया के अंदर एक दीपक जला करता था। औरंगजेब को जब इस बारे में बात पता चली तो उसने अपने सैनिकों को भिजवाकर कुटिया को मटिया मिलेट कर दिया। सैनिकों की नजर जब खेरेश्वर मंदिर पर पड़ी तो उन्होंने उसे भी तोप से उड़ा दिया। लेकिन शिवलिंग को जमीन से निकाल नहीं पाए। मंहत के मुताबिक खुद औरंगजेब मंदिर पर पहुंचा और शिवलिंग को निकालने के लिए दिन रात एक किए पर अश्वथामा के चलते वह कामयाब नहीं हुआ। खेरेश्वर महादेव के शिवलिंग को खंडित करने के लिए उस पर अपनी तलवार से कई वार किये, तलवार की वार के प्रमाण आज भी शिवलिंग में देखे जा सकते हैं।
Featured_image-44

 जानिए मधुमक्खियों का रहस्य :-
वैसे तो खेरेश्वर धाम में साल भर देश-विदेश से भगवान शिव के भक्त आते हैं। लेकिन महाशिवरात्र पर्व के दिन हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। पुजारी ने बताया कि भोर पहर पहले भगवान शिव की पूजा-अर्चना अश्वथामा करते हैं और फिर आम भक्त अपनी मन्नत मांगते हैं। मंदिर में सैकड़ों साल से मधुमक्खियों के छत्ते हैं जो जहरीली भी हैं लेकिन वह किसी भी भक्त को आज तक छति नहीं पहुंचाई। यह भी बताया जाता है कि औरंगजेब से अश्वथामा खुलकर तो नहीं लड़े लेकिन उन्होंने उसके सैनिकों पर इन्हीं मधुमक्खियों से हमला करवाया था। हमले में सैकड़ों मुगल सैनिकों की मौत हुई थी। जिनके शवों को गंगा के किनारे दफनाया गया था। जिनकी कब्रे आज भी मौजूद हैं।
मधुमक्खी-छत्ता

यहीं पर यक्ष ने युधिष्ठर से पूछे गए थे सवाल :-
मंदिर के पास में ही एक तालाब बना हुआ है। गांव वालों की ढेर सारे कमलों से भरे इस तालाब पर अटूट आस्था है। लोगों का मानना है कि यह द्वापर युग का वही गंधर्व सरोवर है जहां यक्ष ने युधिष्ठिर से सवाल पूछे थे। इस तालाब में केवल सफेद रंग के कमल के फूल ही खिलते हैं। लोग दूर-दूर से यहां आकर सफेद कमल पुष्प भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना के लिए ले जाते हैं। खेरेश्वर धाम से करीब 100 मीटर की दूरी पर अश्वत्थामा का मंदिर भी बना है। गांव के लोग अश्वत्थामा को देव के रूप में पूजते हैं इसलिए उन्हें विशेष स्थान देने के लिये मंदिर में उनकी छोटी सी मूर्ति भी स्थापित की है। अश्वत्थामा की मूर्ति के पास एक शिवलिंग भी स्थापित किया गया है। मंदिर के आसपास रहने वाले पुजारी केशव प्रसाद शुक्ल, सरस्वती देवी और मधुबाला ने बताया कि उन्होंने कई बार सफेद लिबास में लंबे चौड़े इंसान को मंदिर आते-जाते देखा है। कुछ पूछने पर वह नहीं बोलता और तेज रोशनी के साथ गायब हो जाता है
1455342901-9966

LEAVE A REPLY