कठुआ गैंगरेप केस : सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को भेजा नोटिस, पीड़ित परिवार को सुरक्षा के दिए आदेश


दिल्ली : जहां एक ओर सरकार ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का अभियान चलाया. वही देशभर में बेटियों के साथ हो रहे अत्याचार व दुष्कर्मों की वारदातों पर भी रोक नहीं लग रही है. कहीं ना कहीं से कोई ना कोई खबर बेटियों से जुड़ी  सुनने को मिल ही जाती है. आप सबको पता होगा कि उन्नाव में बीजेपी विधायक पर महिला ने गैंगरेप का आरोप लगाया. जिसके बाद उस विधायक की गिरफ्तारी व जांच के आदेश दिए हैं. वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर के कठुआ में एक मासूम के साथ  पहले गैंगरेप फिर हत्या का मामला सामने आया. जिसने न्यूज़ चैनल से लेकर सोशल मीडिया पर हाहाकार मचा दिया.

लेकिन उस मासूम के परिवार वालों को निष्पक्ष रुप से सुनवाई नहीं मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की मासूम के साथ गैंगरेप और फिर हत्या के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पीड़िता के पिता द्वारा दायर याचिका पर फौरान जवाब देने के आदेश दिए हैं. पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष सुनवाई और परिवार की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी. इस मामले में सोमवार को सुनवाई की गई थी.

वही, इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने पीड़िता के पिता का पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि इस मामले पर जो माहौल पैदा हो गया है. वह निष्पक्ष सुनवाई के अनुकूल नहीं है. बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने इस मामले में अच्छा काम किया है. पुलिस ने ना केवल आरोपियों को गिरफ्तार किया है, बल्कि साक्ष्यों को भी वैज्ञानिक तरीके से रखा है. पीड़िता की तरफ से दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई जाए और उन्हें अदालत में अपना पक्ष रखने में पूरा सहयोग किया जाए.

निष्पक्ष सुनवाई की मांग

आपको बता दें कि पीड़ित परिवार चाहता है कि इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई हो. लेकिन निचली आदालत में इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी और उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा. इस डर से पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अपील में कहा गया है कि इस मामले की सुनवाई राज्य से बाहर की जाए. उनकी अपील पर सोमवार को सुनवाई हुई.

उधर, निचली अदालत में पीड़ित परिवार का पक्ष रख रहे वकील दीपिका सिंह राजावत ने भी खुद की जान को खतरा बताया था. पीड़ित परिवार ने कहा कि इस केस को चंडीगढ़ की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए. उन्होंने अंदेशा जताया है कि केस ट्रांसफर हुए बिना इसकी सही से जांच नहीं हो पाएगी. याचिका में कहा गया है कि नेताओं को नाबालिग आरोपी से मिलने से रोका जाए. साथ ही जांच की प्रगति रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा जाए.

गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई को लेकर जम्मू-कश्मीर सरकार ने दो विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की है और दोनों ही सिख हैं. इसे इस मामले में हिन्दू मुस्लिम ध्रुवीकरण को देखते हुए तटस्थता सुनिश्चित करने का प्रयास माना जा रहा है.

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